डोनी पोलो हवाई अड्डा, ईटानगर एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है जो राज्य की राजधानी ईटानगर से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। डोनी पोलो हवाई अड्डा, ईटानगर', जो सूर्य (डोनी) और चंद्रमा (पोलो) के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है, और यह राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस हवाईअड्डे तक राष्ट्रीय राजमार्ग -415 से सीधे पहुँचा जा सकता है जो राज्य की राजधानी तक जाने वाली चार लेन सड़क से जुड़ती है । यह नया हवाई अड्डा 645 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया गया है।
आधारभूत संरचना
पैसेंजर टर्मिनल लगभग 3500 वर्गमीटर क्षेत्र में मॉड्यूलर डिजाइन के साथ बनाया गया है जिसमें व्यस्त समय के दौरान 300 यात्रियों को हैंडलिंग करने की सुविधा है । इस हवाईअड्डे का रनवे 2300 मीटर लंबा है।
भवन में यात्रियों तथा एयरलाइनों हेतु आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान किया गया है जैसे
टर्मिनल भवन के बाहर सीटी साइड क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाओं के साथ 100 गाडि़यों के लिए कार पार्किंग की सुविधा है । यह हवाई अड्डा राज्य की राजधानी को हवाई संपर्क प्रदान करता है जिससे भविष्य में अधिकाधिक हवाई संपर्क होगी और सुगमता को बढ़ावा मिलेगा । इस हवाई संपर्क से क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य एवं पर्यटन के माध्यम से आर्थिक विकास में तेजी आएगी तथा अन्य कई आर्थिक गतिविधियाँ को बढ़ावा मिलेगा ।
पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा राज्य अरुणाचल प्रदेश में क्षमता और सुविधाओं के दृष्टिकोण से डोनी पोलो हवाईअड्डा सबसे पहला हवाईअड्डा होगा । यह हवाईअड्डा राजधानी शहर को देश के अन्य शहरों से हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए अरुणाचल प्रदेश के लोगों की लंबे समय से प्रतीक्षित आकांक्षा को पूरा करेगा । यह अरुणाचल प्रदेश राज्य के प्राथमिक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करेगा । अरुणाचल प्रदेश में स्थित यह ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा ए-320/बी-737 प्रकार के विमानों को समायोजित करने वाला पहला हवाई अड्डा होगा, जो लगभग 180 यात्रियों को वहन करने की क्षमता रखता है। यह व्यापार, पर्यटन क्षमता और बेहतर कनेक्टिविटी के दृष्टिकोण से राज्य की राजधानी ईटानगर, असम और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा । यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा तथा किसी भी प्राकृतिक आपदा के मामले में यह प्रभावित क्षेत्रों में बहुत तेजी से राहत प्रदान करने में मददगार होगा। यह कैट-I सिस्टम के साथ न्यूनतम दृश्यता में नाइट लैंडिंग सुविधाओं को संचालित करने तथा इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है । यहाँ उड़ान संचलन में सहायता के लिए मौसम प्रेक्षण केंद्र भी स्थापित है । डीजीसीए द्वारा दिन के आईएफआर प्रचालन के लिए हवाई अड्डा लाइसेंस भी जारी किया गया है।
पहल
नए टर्मिनल भवन को ऊर्जा सम्पन्न भवन बनाने के लिए सभी स्थानों पर एलईडी लाइट लगवाने, एएचयू, एसी कंप्रेसर, कन्वेयर, पंप आदि के लिए ऊर्जा अनुकूल मोटर/ड्राइव का उपयोग, मलजल उपचार संयंत्र का स्थापन किया जाना जिससे उपचार जल को बागबानी हेतु उपयोग किया जा सके जैसी कई उपायों को अपनाया गया है। जल प्रदुषण को रोकने के अतिरिक्त यह टर्मिनल भवन इंसूलेटेड रूफिंग शीशे के छत व पैनेल किया हुआ दीवार होने के कारण बिजली की खपत को भी कम करता है। बिजली अनुकूलन करने के उद्देश्य से भवन में संतुलित अनुपात पर चमकदार व पैनेल दीवारों को लगाया गया है । भवन के आंतरिक भाग को इस तरह से सजाया गया है ताकि यात्रीगण निर्बाध रूप से टहल कर हिमालय की तलहटी का मनोरम नजारे से शांति का अनुभव कर सके । शुरूआती दौर में हवाईअड्डे हेतु 15 केडब्ल्यूपी का एक सौर्य ऊर्जा संयंत्र स्थापना करने की योजना है ताकि न्यूनतम कार्बन के साथ साथ स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त हो सके । यह भवन जीआरआईएचए-IV के मानदंडों का पालन करते हुए बनाया गया है जो कि अपने आप में एक ऊर्जा कार्यक्षम भवन का प्रमाण पत्र है ।
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