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रुपसी हवाई अड्डा भारत के असम राज्य में स्थित एक अंतर्देशीय हवाई अड्डा है। यह असम राज्य के कोकराझार जिले के रुपसी गाँव में स्थित है, इसलिए इसका नाम रुपसी हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा आसपास स्थित इलाकों जैसे गौरीपुर, कोकराझार, धुबड़ी, गोलकगंज, बोंगाईगाँव, गोसाईगाँव आदि के निवासियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करता है।

रुपसी भले ही एक छोटा हवाई अड्डा है, परंतु इसका इतिहास अत्यंत गौरवशाली और महत्त्वपूर्ण है। जिस स्थान पर आज यह हवाईअड्डा स्थित है, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वहाँ कभी सैन्य विमानपट्टी हुआ करती थी। यह विमानपट्टी अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित, अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा उपयोग की गई एवं चीन-बर्मा-भारत रंगमंच की एक अहम कड़ी रही है।

इस हवाई अड्डा से असम और उत्तर-पूर्व के सबसे बड़े शहर गुवाहाटी एवं कोलकाता के लिए हवाई सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। यहाँ वायु पातायात नियंत्रण प्रणाली मौजूद है, जो सुरक्षित लैंडिंग एवं टेक-ऑफ़ की सुविधा प्रदान करती है। रुपसी हवाई अड्डे का रनवे 1771 मीटर लंबा है।

रुपसी के निकट ही ब्रह्मपुत्र नदी पर धुबड़ी-फूलबाड़ी सेतु का कार्य प्रगति पर है। यह सेतु असम में स्थित धुबड़ी और मेघालय में स्थित फूलबाड़ी को जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह सेतु निर्माण के उपरांत भारत का सबसे लंबा नदी सेतु होगा। इसकी अनुमानित लंबाई 19.3 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त, निकट में स्थित गौरीपुर के शाही परिवार द्वारा गदाधर नदी के तट पर निर्मित मतियाबाग राजबाड़ी भी गौरीपुर के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण स्थली है।

इसके अतिरिक्त रुपसी से 70 किलोमीटर दूर स्थित रैमोना राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों को प्रकृति के मध्य रहने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा रुपसी से लगभग 170 किलोमीटर दूर भूटान की सीमा पर स्थित मानस राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों को प्रकृति से रूबरू होने का एक अतुल्य अनुभव करने का अवसर देता है।

यही नहीं, यहाँ से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित महामाया धाम एक सिद्ध शक्तिपीठ और स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। साथ ही धुबड़ी शहर में ब्रह्मपुत्र के तट पर स्थित गुरुद्वारा श्री तेग बहादुर साहिब जी भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के मध्य अत्यंत लोकप्रिय है। इस प्रकार रुपसी को उसकी भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिकता पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल बनाती है।

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